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समय की चाल बाधाएं दूर अच्छे मित्र नदी मकीं हकदार ना आती शर्म कला संगीत की तरह बहती है। बनती रणभूमि उपासना गरीबी हटाने खुशियां लाने गुजरा हुआ कल ढिंढोरा पीटने में पत्थरबाजी से मुक्ति भारतपरिचय चमकते रहो विचारधारा साथ के लिए देश के सपूत

Hindi द्रोपदी के चीर की तरह Quotes